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इकोस्प्रिन 75 (Ecosprin 75): उपयोग, यह कैसे काम करती है, साइड इफेक्ट्स

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इकोस्प्रिन 75 एक गैस्ट्रो-रेज़िस्टेंट टैबलेट है जिसमें 75 मि.ग्रा. एस्पिरिन होती है। इसे दिन में एक बार कम खुराक में लिया जाता है ताकि ख़ून में थक्का बनने की संभावना कम हो। इसका इस्तेमाल उन लोगों में दोबारा दिल का दौरा (हार्ट अटैक) या स्ट्रोक (लकवा) होने का ख़तरा कम करने के लिए होता है जिन्हें पहले से दिल या ख़ून की नलियों की बीमारी है, जैसे दिल के दौरे, स्ट्रोक या मिनी-स्ट्रोक के बाद, या दिल की बाईपास सर्जरी या स्टेंट के बाद। इस खुराक में यह दर्द निवारक दवा नहीं है। यह केवल उन लोगों के लिए है जिन्हें डॉक्टर ने यह दवा लिखी है।

सक्रिय घटक
एस्पिरिन 75 mg
दवा का प्रकार
एंटीप्लेटलेट दवाएँ
किसमें इस्तेमाल होती है
दिल के दौरे और स्ट्रोक से बचाव
असर शुरू होता है
कुछ घंटों में प्लेटलेट्स पर असर; पूरा असर रोज़ की खुराक से कुछ दिनों में बनता है
असर रहता है
हर खुराक प्लेटलेट्स पर उनके पूरे जीवन (7 से 10 दिन) तक असर करती है; नए प्लेटलेट्स बनते रहते हैं, इसलिए रोज़ ली जाती है
खाने के साथ या बिना
पानी के साथ पूरा निगलें; खाने के साथ लेने के बारे में लेबल या डॉक्टर की सलाह मानें
शराब
कम से कम लें; शराब से पेट में ख़ून बहने का ख़तरा बढ़ता है
गर्भावस्था
केवल डॉक्टर की सलाह पर
आदत बनाने वाली
नहीं
निर्माता
यूएसवी प्राइवेट लिमिटेड

फ़ार्मासिस्ट समीक्षा जारी है। यह पेज नीचे दिए गए स्रोतों पर आधारित है और हमारे पंजीकृत फ़ार्मासिस्ट इसकी जाँच कर रहे हैं।

इस पेज पर
  1. इकोस्प्रिन 75 किसलिए इस्तेमाल होती है?
  2. इकोस्प्रिन 75 कैसे काम करती है?
  3. इकोस्प्रिन 75 कैसे लें
  4. इकोस्प्रिन 75 के साइड इफेक्ट्स
  5. किन्हें सावधानी रखनी चाहिए
  6. इकोस्प्रिन 75 के साथ असर डालने वाली दवाएँ और चीज़ें
  7. अगर किसी ने ज़्यादा ले ली हो
  8. कैसे रखें
  9. भारत में नियामक स्थिति
  10. इसी दवा वाले दूसरे ब्रांड
  11. अन्य मात्रा और रूप
  12. आम सवाल

इकोस्प्रिन 75 किसलिए इस्तेमाल होती है?

इकोस्प्रिन 75 का इस्तेमाल डॉक्टर के पर्चे पर, दिल या दिमाग़ तक जाने वाली धमनी को ख़ून के थक्के से बंद होने का ख़तरा कम करने के लिए होता है।

  • जिन लोगों को पहले दिल का दौरा पड़ चुका है, या जिन्हें एंजाइना जैसी कोरोनरी हृदय रोग है, उनमें दोबारा दिल का दौरा पड़ने का ख़तरा कम करना
  • ख़ून के थक्के से होने वाले स्ट्रोक या मिनी-स्ट्रोक (ट्रांज़िएंट इस्कीमिक अटैक, TIA) के दोबारा होने का ख़तरा कम करना
  • दिल की बाईपास सर्जरी के बाद
  • दिल की सिकुड़ी हुई धमनी को स्टेंट से खोलने की प्रक्रिया के बाद, आम तौर पर क्लोपिडोग्रेल जैसी किसी दूसरी एंटीप्लेटलेट दवा के साथ

इकोस्प्रिन 75 कैसे काम करती है?

प्लेटलेट्स ख़ून की बहुत छोटी कोशिकाएँ हैं जो आपस में चिपककर थक्का बनाती हैं। इसके लिए वे साइक्लो-ऑक्सीजिनेज़-1 (COX-1) नाम के एंज़ाइम की मदद से थ्रोम्बोक्सेन A2 नाम का संकेत बनाती हैं। एस्पिरिन प्लेटलेट्स में COX-1 को उनके बाक़ी जीवन भर के लिए रोक देती है, इसलिए वे कम चिपकते हैं और दिल या दिमाग़ की धमनी को थक्के से बंद होने की संभावना कम हो जाती है। प्लेटलेट्स नया एंज़ाइम नहीं बना सकते, इसलिए रोज़ की छोटी खुराक काफ़ी होती है; यह खुराक दर्द या बुख़ार में ठीक से आराम देने के लिए बहुत कम है।

लेने के बाद आपके शरीर में क्या होता है

  1. आप टैबलेट निगलते हैं

    टैबलेट पर एक परत (कोटिंग) होती है जो पेट के एसिड में नहीं घुलती, जिससे पेट की अंदरूनी परत पर सीधी जलन कम करने में मदद मिलती है। इसीलिए इसे पानी के साथ पूरा निगलना चाहिए, कुचलना या चबाना नहीं चाहिए।

  2. छोटी आँत में दवा निकलती है

    छोटी आँत में कोटिंग घुल जाती है और एस्पिरिन ख़ून में सोख ली जाती है। कोटिंग की वजह से ऐसा कुछ मिनटों में नहीं, बल्कि खुराक के कुछ घंटे बाद होता है।

  3. रास्ते में ही प्लेटलेट्स से मिलती है

    आँतों से आने वाला ख़ून बाक़ी शरीर तक पहुँचने से पहले लिवर से होकर गुज़रता है, और इस ख़ून के प्लेटलेट्स सबसे पहले एस्पिरिन से मिलते हैं। इसके बाद ज़्यादातर एस्पिरिन आँत की दीवार और लिवर में सैलिसिलिक एसिड में बदल जाती है; सैलिसिलिक एसिड का प्लेटलेट्स पर बहुत कम असर होता है।

  4. प्लेटलेट्स बंद हो जाते हैं

    एस्पिरिन जिस भी प्लेटलेट तक पहुँचती है, उसके अंदर के COX-1 एंज़ाइम से जुड़कर उसे हमेशा के लिए रोक देती है। वह प्लेटलेट अब थ्रोम्बोक्सेन A2 नहीं बना पाता, जो वह दूसरे प्लेटलेट्स को बुलाने और आपस में चिपकने के लिए इस्तेमाल करता है।

  5. असर दवा से ज़्यादा देर रहता है

    एस्पिरिन ख़ुद लगभग आधे घंटे में ख़ून से निकल जाती है, और सैलिसिलिक एसिड कुछ घंटों में, मुख्य रूप से गुर्दों के ज़रिए पेशाब से। लेकिन रुका हुआ प्लेटलेट अपने बाक़ी जीवन, लगभग 7 से 10 दिन, तक कम चिपचिपा रहता है।

  6. नए प्लेटलेट्स आते रहते हैं

    बोन मैरो हर दिन नए प्लेटलेट्स छोड़ता है, कुल का लगभग दसवाँ हिस्सा। रोज़ की खुराक इन नए प्लेटलेट्स को भी रोक देती है, इसीलिए यह रोज़ ली जाती है। आख़िरी खुराक के बाद, जैसे-जैसे नए प्लेटलेट्स पुराने की जगह लेते हैं, कई दिनों में ख़ून का थक्का बनना धीरे-धीरे सामान्य हो जाता है।

इकोस्प्रिन 75 कैसे लें

इकोस्प्रिन 75 ठीक वैसे ही लें जैसे आपके डॉक्टर ने लिखी है या पैक पर छपा है। खुराक और आपको यह कितने समय तक लेनी है, यह आपके डॉक्टर तय करते हैं।

  • इसे आम तौर पर दिन में एक बार, हर दिन लगभग एक ही समय पर लिया जाता है।
  • टैबलेट को एक गिलास पानी के साथ पूरा निगलें। इसे कुचलें, चबाएँ या तोड़ें नहीं, क्योंकि कोटिंग पेट की रक्षा करती है।
  • इसे खाने के साथ या खाने के बाद लेना है, इसके लिए लेबल या डॉक्टर की सलाह मानें।
  • अगर कोई खुराक छूट जाए, तो याद आते ही ले लें। अगर अगली खुराक का समय लगभग हो गया हो, तो छूटी हुई खुराक छोड़ दें। दो खुराकें एक साथ न लें।
  • इसकी अक्सर लंबे समय तक, कभी-कभी जीवन भर, ज़रूरत होती है। इसे अपने मन से बंद न करें; पहले डॉक्टर से बात करें, क्योंकि बंद करने से थक्का बनने का ख़तरा बढ़ सकता है।
  • यह 16 साल से कम उम्र के बच्चों और किशोरों के लिए नहीं है, जब तक कोई विशेषज्ञ डॉक्टर न लिखे, क्योंकि एस्पिरिन का संबंध रेये सिंड्रोम नाम की एक दुर्लभ लेकिन गंभीर बीमारी से है।
  • इसे दर्द या बुख़ार के लिए इस्तेमाल न करें। 75 मि.ग्रा. पर यह दर्द में बहुत कम मदद करती है, और कोटिंग इसके असर में देर करती है।

इकोस्प्रिन 75 कैसे लें

इकोस्प्रिन 75 के साइड इफेक्ट्स

ज़्यादातर लोग कम खुराक वाली एस्पिरिन बिना किसी गंभीर परेशानी के लेते हैं। चूँकि इससे ख़ून का थक्का कम आसानी से बनता है, इसका मुख्य ख़तरा ख़ून बहना है, ख़ासकर पेट से।

कम होने वाले या हल्के

  • अपच या पेट दर्द
  • जी मिचलाना
  • आसानी से नील पड़ना
  • छोटे कटने, नाक से ख़ून आने या मसूड़ों से ख़ून आने पर सामान्य से ज़्यादा देर तक ख़ून बहना

दुर्लभ लेकिन गंभीर: तुरंत डॉक्टर से मिलें

  • पेट या आँतों में ख़ून बहने के लक्षण: काला, तारकोल जैसा मल, ख़ून की उल्टी या कॉफ़ी के चूरे जैसी दिखने वाली उल्टी, या पीली त्वचा और कमज़ोरी के साथ पेट दर्द। तुरंत डॉक्टरी मदद लें
  • दिमाग़ में ख़ून बहने के लक्षण: अचानक तेज़ सिरदर्द, शरीर के एक तरफ़ कमज़ोरी, भ्रम, बोलने में दिक्कत या दौरे (फ़िट्स)। तुरंत 112 पर कॉल करें
  • गंभीर एलर्जी के लक्षण: चेहरे, होंठ, जीभ या गले में सूजन, खुजली वाले उभरे हुए दाने, या साँस लेने में तकलीफ़
  • घरघराहट, साँस फूलना या अस्थमा का दौरा, ख़ासकर अस्थमा वाले लोगों में
  • त्वचा की गंभीर प्रतिक्रिया: त्वचा का लाल होना और छाले पड़ना या छिलना, या मुँह में छाले। तुरंत डॉक्टरी मदद लें
  • ख़ून बहना जो रुके नहीं, पेशाब में ख़ून, या माहवारी में सामान्य से बहुत ज़्यादा ख़ून आना
  • कानों में घंटी जैसी आवाज़ या कम सुनाई देना

इकोस्प्रिन 75 के साइड इफेक्ट्स

किन्हें सावधानी रखनी चाहिए

कुछ लोगों को कम खुराक वाली एस्पिरिन लेने से पहले डॉक्टर से पूछना चाहिए, या इसे लेते समय अतिरिक्त सावधानी की ज़रूरत होती है।

  • अभी या पहले कभी पेट या ड्यूओडेनम का अल्सर, या पहले कभी पेट या आँतों से ख़ून बहना
  • हीमोफ़ीलिया जैसा ख़ून बहने का कोई विकार, या प्लेटलेट्स की कम संख्या
  • अस्थमा, नाक में पॉलिप्स, या पहले कभी एस्पिरिन, आइबुप्रोफ़ेन या किसी दूसरी NSAID दवा से प्रतिक्रिया, जैसे घरघराहट, दाने या सूजन
  • ऐसा हाई ब्लड प्रेशर जो नियंत्रण में न हो
  • गाउट (जोड़ों की एक तरह की सूजन): कम खुराक वाली एस्पिरिन यूरिक एसिड बढ़ा सकती है और दौरा ला सकती है
  • गंभीर लिवर या गुर्दे की बीमारी
  • बढ़ती उम्र: बुज़ुर्गों में पेट से ख़ून बहने की संभावना ज़्यादा होती है
  • कोटिंग से पेट में ख़ून बहने का ख़तरा ख़त्म नहीं होता, क्योंकि एस्पिरिन ख़ून के ज़रिए भी पेट की अंदरूनी परत पर असर करती है
  • सर्जरी या दाँतों का इलाज, जिसमें दाँत निकलवाना भी शामिल है: सर्जन या दंत चिकित्सक को बताएँ कि आप एस्पिरिन लेते हैं। इसे अपने मन से बंद न करें; इसे कुछ समय रोकना है या नहीं, यह आपके डॉक्टर तय करेंगे
  • बुख़ार, ख़ासकर डेंगू के मौसम में: डॉक्टर को दिखाएँ और बताएँ कि आप एस्पिरिन लेते हैं, क्योंकि डेंगू में एस्पिरिन से बचा जाता है
  • 16 साल से कम उम्र के बच्चे और किशोर: एस्पिरिन का संबंध रेये सिंड्रोम से है
  • गर्भावस्था या स्तनपान: गर्भावस्था में कभी-कभी कम खुराक वाली एस्पिरिन लिखी जाती है, लेकिन केवल डॉक्टर की सलाह पर; ज़्यादा खुराक से बचा जाता है, ख़ासकर 20 हफ़्ते से

इकोस्प्रिन 75 के साथ असर डालने वाली दवाएँ और चीज़ें

कई दवाएँ एस्पिरिन के साथ लेने पर ख़ून बहने का ख़तरा बढ़ाती हैं, और एस्पिरिन कुछ दूसरी दवाओं के काम करने का तरीक़ा बदलती है। आप जो भी दवा, जड़ी-बूटी या सप्लीमेंट लेते हैं, उसके बारे में डॉक्टर या फ़ार्मासिस्ट को बताएँ।

  • ख़ून पतला करने वाली दवाएँ (एंटीकोएगुलेंट), जैसे वारफ़रिन, एसीनोकूमारोल, हेपरिन, रिवारोक्साबान या एपिक्साबान: गंभीर रूप से ख़ून बहने का ख़तरा ज़्यादा होता है। इन्हें साथ में केवल तभी लें जब डॉक्टर ने दोनों लिखी हों
  • दूसरी एंटीप्लेटलेट दवाएँ, जैसे क्लोपिडोग्रेल, प्रासुग्रेल या टिकाग्रेलोर: अक्सर जान-बूझकर साथ में लिखी जाती हैं, जैसे स्टेंट के बाद, लेकिन ख़ून बहने की संभावना ज़्यादा होती है
  • NSAID दर्द निवारक दवाएँ, जैसे आइबुप्रोफ़ेन, डाइक्लोफ़ेनैक, नेप्रोक्सेन या मेफ़ेनामिक एसिड: पेट में अल्सर और ख़ून बहने का ख़तरा ज़्यादा। नियमित रूप से ली गई आइबुप्रोफ़ेन प्लेटलेट्स पर एस्पिरिन का असर भी कम कर सकती है। पैरासिटामोल आम तौर पर कम खुराक वाली एस्पिरिन के साथ ली जा सकती है; फ़ार्मासिस्ट से पूछें
  • SSRI नाम की अवसाद-रोधी दवाएँ, जैसे सर्ट्रालीन या पैरोक्सेटीन, और प्रेडनिसोलोन जैसी स्टेरॉयड गोलियाँ: पेट से ख़ून बहने का ख़तरा ज़्यादा
  • मेथोट्रेक्सेट: एस्पिरिन मेथोट्रेक्सेट का स्तर बढ़ा सकती है; हफ़्ते में 15 मि.ग्रा. से ज़्यादा मेथोट्रेक्सेट के साथ इसे बिल्कुल नहीं लेना चाहिए
  • ब्लड प्रेशर और दिल की कुछ दवाएँ, जैसे ACE इनहिबिटर और पेशाब बढ़ाने वाली गोलियाँ (डाइयूरेटिक): एस्पिरिन उनका असर कम कर सकती है और, ख़ासकर शरीर में पानी की कमी होने पर, गुर्दों पर दबाव डाल सकती है
  • लिथियम, डिगॉक्सिन और वैल्प्रोएट: एस्पिरिन इनका स्तर बढ़ा सकती है
  • सल्फ़ोनिलयूरिया नाम की डायबिटीज़ की दवाएँ, जैसे ग्लिमेपिराइड: ब्लड शुगर उम्मीद से ज़्यादा गिर सकती है
  • शराब: पेट से ख़ून बहने का ख़तरा बढ़ाती है

अगर किसी ने ज़्यादा ले ली हो

गलती से एक अतिरिक्त टैबलेट लेने से नुक़सान होने की संभावना कम है। एस्पिरिन की ज़्यादा मात्रा ख़तरनाक हो सकती है, जिससे कानों में घंटी जैसी आवाज़, उल्टी, तेज़ साँस, भ्रम और गंभीर मामलों में दौरे (फ़िट्स) हो सकते हैं। अगर किसी ने, ख़ासकर किसी बच्चे ने, लिखी गई मात्रा से बहुत ज़्यादा ले ली हो, तो 112 पर कॉल करें या नज़दीकी अस्पताल जाएँ और दवा का पैक साथ ले जाएँ।

कैसे रखें

30°C से कम तापमान पर, सूखी जगह में, रोशनी और नमी से बचाकर, मूल स्ट्रिप में और बच्चों की पहुँच से दूर रखें। एक्सपायरी डेट के बाद इस्तेमाल न करें। रखने के सही तरीक़े के लिए पैक देखें।

भारत में नियामक स्थिति

भारत में बिक्री के लिए स्वीकृत। केवल एस्पिरिन वाली दवा ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट की धारा 26A के तहत प्रतिबंधित दवाओं की CDSCO सूची में नहीं है। इकोस्प्रिन 75 में केवल एस्पिरिन है।

इसी दवा वाले दूसरे ब्रांड

एस्पिरिन 75 मि.ग्रा. गैस्ट्रो-रेज़िस्टेंट टैबलेट दूसरे ब्रांड नामों से और जेनेरिक दवा के रूप में भी मिलती है, जिसमें प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र भी शामिल हैं। इनमें वही दवा होती है; ताक़त (स्ट्रेंथ) के लिए लेबल देखें। इकोस्प्रिन के कुछ दूसरे उत्पादों में क्लोपिडोग्रेल या एटोरवास्टेटिन जैसी दूसरी दवाएँ भी होती हैं, इसलिए डॉक्टर से पूछे बिना इन्हें आपस में न बदलें।

अन्य मात्रा और रूप

इकोस्प्रिन USV की ओर से एक से अधिक मात्रा में मिलती है, जिनमें 75 mg और 150 mg की गैस्ट्रो-रेज़िस्टेंट टैबलेट शामिल हैं, और दूसरी दवाओं के साथ कॉम्बिनेशन कैप्सूल में भी, जैसे इकोस्प्रिन AV (एस्पिरिन के साथ एटोरवास्टेटिन)। मात्रा और घटक पैक पर छपे होते हैं और सभी उत्पादों में एक जैसे नहीं होते, इसलिए अपने पास वाली दवा का लेबल देखें।

आम सवाल

क्या इकोस्प्रिन 75 दर्द निवारक दवा है?

नहीं। एस्पिरिन दर्द में केवल बहुत ज़्यादा खुराक पर आराम देती है, जैसे 300 मि.ग्रा. या उससे ज़्यादा। 75 मि.ग्रा. पर यह मुख्य रूप से प्लेटलेट्स को कम चिपचिपा बनाती है, और कोटिंग इसके असर में देर करती है। सिरदर्द या बुख़ार के लिए अतिरिक्त टैबलेट न लें; डॉक्टर या फ़ार्मासिस्ट से पूछें कि आपके लिए कौन-सी दर्द निवारक दवा ठीक है।

मुझे इकोस्प्रिन 75 रोज़ क्यों लेनी पड़ती है?

हर खुराक उस समय ख़ून में मौजूद प्लेटलेट्स को रोकती है, और यह असर उनके 7 से 10 दिन के जीवन तक रहता है। लेकिन आपका शरीर हर दिन नए प्लेटलेट्स बनाता है, इसलिए रोज़ की खुराक उनमें से काफ़ी को कम चिपचिपा रखती है, ताकि थक्का बनने का ख़तरा कम रहे।

क्या मैं इकोस्प्रिन 75 लेना बंद कर सकता/सकती हूँ?

अपने मन से बंद न करें, भले ही आप ठीक महसूस करें। जिन लोगों को दिल का दौरा, स्ट्रोक या स्टेंट हो चुका है, उनमें इसे बंद करने से थक्का बनने का ख़तरा बढ़ सकता है। अगर आपको साइड इफेक्ट्स हों या ऑपरेशन करवाना हो, तो पहले डॉक्टर से बात करें।

क्या मुझे अपने दंत चिकित्सक या सर्जन को बताना चाहिए कि मैं इकोस्प्रिन 75 लेता/लेती हूँ?

हाँ। एस्पिरिन से ख़ून आसानी से बहता है, दाँत निकलवाने या ऑपरेशन के बाद भी। इलाज करने वाले हर डॉक्टर और दंत चिकित्सक को बताएँ। वे दवा लिखने वाले डॉक्टर के साथ मिलकर तय करेंगे कि इसे जारी रखना है या कुछ दिनों के लिए रोकना है। इसे ख़ुद बंद न करें।

क्या मैं इकोस्प्रिन 75 के साथ कोई दर्द निवारक दवा ले सकता/सकती हूँ?

पैरासिटामोल आम तौर पर कम खुराक वाली एस्पिरिन के साथ ली जा सकती है। आइबुप्रोफ़ेन, डाइक्लोफ़ेनैक या नेप्रोक्सेन जैसी NSAID दर्द निवारक दवाएँ पेट से ख़ून बहने का ख़तरा बढ़ाती हैं, और नियमित आइबुप्रोफ़ेन एस्पिरिन का असर कम कर सकती है, इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना इनसे बचें। कोई भी दर्द निवारक दवा ख़रीदने से पहले फ़ार्मासिस्ट से पूछें।

इकोस्प्रिन 75 खाने से पहले लें या बाद में?

लेबल या अपने डॉक्टर की सलाह मानें। टैबलेट को हर दिन लगभग एक ही समय पर एक गिलास पानी के साथ पूरा निगलें। इसे कुचलें या चबाएँ नहीं, क्योंकि कोटिंग इसलिए है कि दवा पेट में नहीं, बल्कि आँत में निकले।

क्या स्वस्थ लोगों को दिल के दौरे से बचने के लिए रोज़ एस्पिरिन लेनी चाहिए?

डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं। रोज़ एस्पिरिन सबसे ज़्यादा उन लोगों में मदद करती है जिन्हें पहले से दिल या ख़ून की नलियों की बीमारी है, या जिन्हें दिल का दौरा या स्ट्रोक हो चुका है। जिन लोगों को ये बीमारियाँ नहीं हैं, उनमें ख़ून बहने का ख़तरा फ़ायदे से ज़्यादा हो सकता है। डॉक्टर हर व्यक्ति के लिए इसे तौलते हैं।

इकोस्प्रिन 75 लेते समय मुझे आसानी से नील क्यों पड़ते हैं?

एस्पिरिन प्लेटलेट्स को कम चिपचिपा बनाती है, इसलिए छोटी चोटों से ज़्यादा देर तक ख़ून बहता है और नील आसानी से पड़ते हैं। यह अपेक्षित है और आम तौर पर हल्का होता है। अगर ख़ून बहना न रुके या बिना वजह बड़े नील पड़ें तो डॉक्टर को दिखाएँ, और अगर काला मल दिखे या ख़ून की उल्टी हो तो तुरंत दिखाएँ।

क्या मैं गर्भावस्था में या स्तनपान के दौरान इकोस्प्रिन 75 ले सकती हूँ?

केवल तभी, जब आपके डॉक्टर सलाह दें। डॉक्टर कभी-कभी गर्भावस्था में कम खुराक वाली एस्पिरिन लिखते हैं, जैसे प्री-एक्लेम्पसिया का ख़तरा कम करने के लिए। ज़्यादा खुराक से बचा जाता है, ख़ासकर 20 हफ़्ते से। थोड़ी मात्रा माँ के दूध में जाती है, इसलिए स्तनपान करा रही हों तो डॉक्टर से पूछें।

क्या इकोस्प्रिन 75 लेते समय शराब पी सकते हैं?

शराब और एस्पिरिन दोनों पेट की अंदरूनी परत में जलन कर सकती हैं, इसलिए शराब पीने से पेट से ख़ून बहने का ख़तरा बढ़ता है। शराब कम रखें और ज़्यादा पीने से बचें। अपने डॉक्टर से पूछें कि आपके लिए कितनी, अगर कोई, ठीक है।

स्रोत

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